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टालमटोल की आदत कैसे छोड़ें? | How to Stop Procrastinating by Steve Scott Book Summary in Hindi

How to Stop Procrastinating by Steve Scott Book Summary in Hindi

How to Stop Procrastinating by Steve Scott Book Summary in Hindi
टालमटोल की आदत कैसे छोड़ें? | How to Stop Procrastinating by Steve Scott Book Summary in Hindi

राधे राधे दोस्तों, www.learningforlife.cc में आपका स्वागत है। आपने कभी न कभी किसी काम को टाला ज़रूर होगा। हर कोई ऐसा करता है। लेकिन हम कामों में देरी क्यों करते हैं, जबकि हम जानते हैं कि यह हमारे लिए ठीक नहीं है?

मान लीजिए आपको अपनी माँ को फोन करना है, लेकिन आप बहुत थके हुए हैं, इसलिए आप सोचते हैं, "मैं उन्हें इस हफ्ते के आखिर में कॉल कर लूँगा।" या शायद आप कोई नया शौक (hobby) शुरू करना चाहते हैं, लेकिन गलती होने के डर से आप खुद को रोक लेते हैं। काम टालने की वजहें हर किसी के लिए अलग हो सकती हैं, लेकिन नतीजा हमेशा एक ही होता है।

इस सारांश (summary) में आप जानेंगे कि काम टालने की असली वजह को समझना ही उसे दूर करने का सबसे बड़ा तरीका है। आप सीखेंगे कि अपनी जिम्मेदारियों को कैसे साफ रखें, ज़रूरी कामों पर कैसे ध्यान दें और हर तीन महीने (quarterly) के सही लक्ष्य कैसे तय करें। आप यह भी जानेंगे कि 'ना' कहना सीखने से आप अपने ज़रूरी कामों के लिए समय कैसे बचा सकते हैं, और हफ्ते भर की प्लानिंग करने की आदत आपको काम टालने से कैसे रोक सकती है।

इस पोस्ट में बताया गया हर तरीका आपको आलस छोड़कर काम में मन लगाने में मदद करेगा, जिससे आप अपने जीवन और करियर में आगे बढ़ पाएंगे।

1. बेहतर उत्पादकता (Productivity) के लिए अपनी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करें

काम टालने की आदत अक्सर तब शुरू होती है जब हमारे पास कामों की बहुत लंबी लिस्ट हो जाती है। तनाव कम करने और काम की रफ़्तार बढ़ाने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को समझना और उन्हें मैनेज करना बहुत ज़रूरी है। अगर आप अक्सर कामों के बोझ तले दबा हुआ महसूस करते हैं, तो उन्हें सही ढंग से व्यवस्थित (organize) करने से आपको वह स्पष्टता मिलेगी जिसकी आपको ज़रूरत है।

इसकी शुरुआत करने के लिए 30 से 60 मिनट का समय निकालें और अपनी उन सभी जिम्मेदारियों और लक्ष्यों को लिख लें जिन्हें आप अगले एक साल में पूरा करना चाहते हैं। आप इसके लिए एक साधारण डायरी का इस्तेमाल कर सकते हैं या 'एवरनोट' (Evernote) जैसे किसी डिजिटल ऐप का। ज़रूरी बात यह है कि आप इसे नियमित रूप से करें। यह लिस्ट आपके लिए एक गाइड की तरह काम करेगी, जिससे आप अपनी प्रगति पर नज़र रख सकेंगे।

इस काम को करने के दो मुख्य तरीके हैं। पहला है 'गेटिंग थिंग्स डन' (GTD) तरीका। इसमें आपको अपने हर पेंडिंग काम को लिखना होता है, चाहे वह ऑफिस का हो या घर का। इसमें बड़े प्रोजेक्ट्स से लेकर रोज़ाना के छोटे-मोटे काम तक सब शामिल होते हैं। हालांकि यह तरीका बहुत असरदार है, लेकिन इसमें समय और मेहनत ज़्यादा लगती है, जो काम टालने की आदत वाले लोगों को थोड़ा मुश्किल लग सकता है।

दूसरा तरीका 'फोकस्ड अप्रोच' है, जिसमें आप सिर्फ उन्हीं कामों पर ध्यान देते हैं जिन्हें आप अगले एक साल के भीतर पूरा करना चाहते हैं। यह तरीका आपको ज़रूरी ऑफिस प्रोजेक्ट्स, खुद को बेहतर बनाने के लक्ष्य, परिवार के साथ छुट्टियाँ या अपनी सेहत जैसे ज़रूरी कामों को प्राथमिकता देने में मदद करता है। कम समय के कामों पर ध्यान देने से आप घबराएंगे नहीं और उन कामों को तुरंत शुरू कर पाएंगे।

जब आप अपनी लिस्ट बना रहे हों, तो सब कुछ एकदम परफेक्ट लिखने की चिंता न करें। असल मकसद यह है कि आपके दिमाग में जो भी काम चल रहे हैं, उन्हें कागज़ या स्क्रीन पर उतार दिया जाए। इससे आपके दिमाग का बोझ कम होगा और रोज़ाना होने वाली घबराहट भी घटेगी। इस लिस्ट को अपने पास रखें और जैसे-जैसे काम पूरे हों या नए काम आएं, इसे अपडेट करते रहें।

अपनी जिम्मेदारियों को साफ तौर पर समझकर आप न केवल अपना काम आसान बनाते हैं, बल्कि अपने समय को सही ढंग से मैनेज करना भी सीखते हैं। यह उलझन को खत्म करके काम शुरू करने की दिशा में पहला कदम है।

2. सबसे ज़्यादा असर डालने वाले पाँच मुख्य प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दें

हर वक्त व्यस्त रहने को अक्सर एक अच्छा गुण माना जाता है, लेकिन असली उत्पादकता (productivity) हर पल को कामों से भर देने में नहीं, बल्कि उन कामों को करने में है जो सच में मायने रखते हैं। काम टालने की आदत से बचने का अगला कदम यह है कि आप एक साथ बहुत सारे काम करने (multitasking) के बजाय, कुछ खास और मुख्य प्रोजेक्ट्स पर अपना ध्यान केंद्रित करें।

यह तरीका '25-5 नियम' पर आधारित है, जो प्राथमिकताओं को चुनने का एक दमदार तरीका है। सबसे पहले उन 25 लक्ष्यों की लिस्ट बनाएं जिन्हें आप हासिल करना चाहते हैं। अब इस लिस्ट में से अपने सबसे ज़रूरी पाँच लक्ष्यों को चुनें। ये पाँच लक्ष्य ही आपका मुख्य काम होने चाहिए। बाकी बचे हुए 20 लक्ष्य? उन्हें तब तक किनारे रख दें और उन पर बिल्कुल ध्यान न दें, जब तक कि आप अपने पहले पाँच लक्ष्य पूरे नहीं कर लेते। यह तरीका आपके फैसले लेने की प्रक्रिया को आसान बनाता है और यह पक्का करता है कि आपकी मेहनत वहीं लग रही है जहाँ सबसे ज़्यादा फायदा हो।

इसे सही से लागू करने के लिए, सबसे पहले अपने मुख्य मूल्यों (core values) को पहचानें—यानी वे बातें जो आपके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में सबसे ज़्यादा मायने रखती हैं। अपने पुराने अनुभवों को याद करें कि आपको कब सबसे ज़्यादा खुशी और गर्व महसूस हुआ था। इससे आपको सही प्रोजेक्ट्स चुनने में मदद मिलेगी, ताकि आपके रोज़ाना के काम आपके मूल्यों के साथ मेल खाएं।

इसके बाद, उन कामों या प्रोजेक्ट्स की लिस्ट बनाएं जिन्हें आप करना चाहते हैं। अपने मूल्यों के आधार पर उनमें से उन पाँच को चुनें जो आपको सबसे ज़्यादा उत्साहित करते हैं और आपके जीवन के लिए बहुत ज़रूरी हैं। इन पाँच कामों को करने का पक्का इरादा करें और बाकी सबको जान-बूझकर बाद के लिए टाल दें। यह तरीका काम के भारी बोझ को छोटे और अर्थपूर्ण हिस्सों में बदल देता है।

इस तरीके को अपनाकर आप न केवल अपना समय मैनेज करते हैं, बल्कि यह भी पक्का करते हैं कि आपका हर घंटा आपके बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है। यह काम टालने की आदत के खिलाफ एक बड़ा कदम है, क्योंकि जब आपकी मेहनत आपके लिए ज़रूरी कामों में लगती है, तो आप खुद-ब-खुद आलस छोड़कर आगे बढ़ने लगते हैं।

3. सफलता पाने के लिए हर तीन महीने (Quarterly) के 'SMART' लक्ष्य तय करें

काम टालने की आदत को छोड़ने और सफलता पाने के लिए सही लक्ष्य चुनना बहुत ज़रूरी है। पूरे साल का एक बड़ा लक्ष्य बनाने के बजाय, हर तीन महीने के छोटे लक्ष्य बनाना बेहतर होता है। इससे आपका उत्साह बना रहता है और आप अपने काम पर बेहतर ध्यान दे पाते हैं। इसे 'SMART' लक्ष्य (goals) के ज़रिए आसानी से किया जा सकता है।

SMART का मतलब है:

Specific (स्पष्ट): लक्ष्य साफ होना चाहिए कि आप क्या हासिल करना चाहते हैं।
Measurable (मापने योग्य): लक्ष्य ऐसा हो जिसे मापा जा सके, ताकि आपको पता चले कि आपने कितनी प्रगति की है।
Attainable (पाने योग्य): लक्ष्य वास्तविक होना चाहिए, जिसे आप सच में पूरा कर सकें।
Relevant (प्रासंगिक): लक्ष्य आपके जीवन या करियर की तरक्की से जुड़ा होना चाहिए।
Time-bound (समय-सीमा): हर काम को पूरा करने की एक आखिरी तारीख (deadline) होनी चाहिए।

जब किसी काम की डेडलाइन होती है, तो उसे टालने की गुंजाइश कम हो जाती है। लेकिन लक्ष्य तय करते समय लचीला (flexible) होना भी ज़रूरी है। कभी-कभी कुछ बड़े कामों में तीन महीने से ज़्यादा का समय लग सकता है, इसलिए ज़रूरत पड़ने पर अपने प्लान में बदलाव करने के लिए तैयार रहें।

इसे सही से लागू करने के लिए, एक बार में बहुत सारे काम न लें। आपने पहले जो पाँच मुख्य प्रोजेक्ट्स चुने थे, उन्हीं पर ध्यान दें। हर हफ्ते और हर तीन महीने में अपने कामों की समीक्षा (review) करें कि आप सही दिशा में जा रहे हैं या नहीं। अपनी लिस्ट बनाने और कामों को ट्रैक करने के लिए आप 'Todoist' या 'Evernote' जैसे ऐप्स की मदद ले सकते हैं।

हर तीन महीने के SMART लक्ष्य बनाकर, आप न केवल अपने उद्देश्यों को साफ करते हैं, बल्कि लगातार आगे बढ़ने की आदत भी विकसित करते हैं। लंबी सफलता के लिए यह बहुत ज़रूरी कदम है।

4. 'ना' कहने की कला में माहिर बनें

अपना ध्यान भटकने से बचाने और काम टालने की आदत को रोकने के लिए 'ना' कहना सीखना बहुत ज़रूरी है। जब हमारे पास बहुत सारे काम या रिक्वेस्ट आती हैं, तो हम अक्सर अपनी क्षमता से ज़्यादा काम ले लेते हैं—यही वह रास्ता है जो हमें तनाव और काम टालने की ओर ले जाता है। यह कदम आपको उन कामों को मना करने की ताकत देता है जो आपके मुख्य प्रोजेक्ट्स से मेल नहीं खाते, ताकि आप अपना समय और ऊर्जा सबसे ज़रूरी लक्ष्यों के लिए बचा सकें।

इस हुनर को सीखने का पहला कारण यह है कि आप अपने शेड्यूल को बहुत ज़्यादा भरने से बचा सकें। जब बहुत सारे काम होते हैं, तो हम अक्सर मुश्किल कामों को कल पर टालने लगते हैं। इसके अलावा, दूसरों को खुश करने की इच्छा हमें ऐसे काम हाँ करने पर मजबूर कर देती है जो हमारे खुद के काम में बाधा डालते हैं। कभी-कभी कुछ नए काम आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन वे ज़रूरी नहीं होते और आपका ध्यान भटका सकते हैं।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए, उन कामों को विनम्रता से और तुरंत मना करना शुरू करें जो आपके लक्ष्यों से नहीं जुड़ते। अपनी प्राथमिकताओं के बारे में ईमानदार और स्पष्ट रहने से लोग आपकी बात को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। अगर कोई ऐसा काम है जिसे टाला नहीं जा सकता और वह आपके मुख्य प्रोजेक्ट का हिस्सा भी नहीं है, तो उसे अपने किसी बड़े लक्ष्य से जोड़कर देखें। उदाहरण के लिए, अगर घर में सुख-शांति आपके लिए ज़रूरी है, तो बर्तन धोने जैसे रोज़ाना के कामों को उस शांति और सुकून से जोड़कर देखें।

इस बात की समय-समय पर जाँच करना ज़रूरी है कि कोई नया काम आपके लक्ष्यों के हिसाब से सही है या नहीं। अगर कोई नया मौका सामने आता है, तो पहले यह देखें कि क्या वह सच में फायदेमंद है या सिर्फ आपका ध्यान भटकाने वाली एक चीज़।

ऑफिस में अपने बॉस के साथ अपने काम के बोझ और प्राथमिकताओं पर चर्चा करने से भी चीज़ें आसान हो जाती हैं। अपनी सीमाएं तय करके और सोच-समझकर काम चुनकर आप अपनी कार्यक्षमता (productivity) बढ़ा सकते हैं। यह तरीका आपके समय का सही इस्तेमाल पक्का करता है और आपको अपने बड़े लक्ष्यों की ओर ले जाता है।

5. हफ्ते की सही प्लानिंग से आलस दूर करें और उत्पादकता (Productivity) बढ़ाएं

काम टालने की आदत को कम करने और अपनी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए समय का सही प्रबंधन (management) बहुत ज़रूरी है। जब आप हफ्ते भर के ज़रूरी कामों का एक व्यवस्थित शेड्यूल बना लेते हैं, तो आप उस घबराहट से बच जाते हैं जिसकी वजह से अक्सर हम काम को कल पर टाल देते हैं। यह तरीका आपकी प्राथमिकताओं को साफ करता है और आपका समय उन बेकार के कामों से बचाता है जो आपकी तरक्की में रुकावट बनते हैं।

इसकी शुरुआत "बड़ी चट्टानों" (big rocks) पर ध्यान देकर करें—यानी वे मुख्य काम जो आपके जीवन और करियर के लिए सबसे ज़्यादा कीमती हैं। ये काम परिवार के साथ समय बिताना, करियर में आगे बढ़ना या अपनी सेहत का ध्यान रखना हो सकते हैं। इन "बड़ी चट्टानों" को पहले समय देने से यह पक्का हो जाता है कि छोटे-मोटे कामों (कंकड़ और रेत) में उलझने से पहले आपके सबसे ज़रूरी काम पूरे हो जाएं।

अपने हफ्ते की अच्छी प्लानिंग के लिए खुद से तीन सवाल पूछें: मेरी व्यक्तिगत जिम्मेदारियां क्या हैं? मेरे सबसे ज़रूरी प्रोजेक्ट्स कौन से हैं? और मेरे पास कितना समय बचा है? इन सवालों पर गौर करने से आप अपने हफ्ते के लिए सही उम्मीदें रख पाएंगे और काम के बोझ से दबेंगे नहीं।

यहाँ आप 80/20 नियम का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। यह नियम कहता है कि आपके 80% नतीजे आपके सिर्फ 20% प्रयासों (efforts) से आते हैं। उन कामों को पहचानें जिनसे आपको सबसे बड़े और अच्छे नतीजे मिलते हैं, और अपनी ऊर्जा वहीं लगाएं। इन ज़रूरी कामों को शेड्यूल करने के लिए 'गूगल कैलेंडर' जैसे टूल्स का इस्तेमाल करें ताकि आपके परिवार या साथियों को भी आपके बिजी होने की जानकारी रहे।

अपनी एकाग्रता (focus) बढ़ाने के लिए एक जैसे कामों को एक साथ करें (Batching) और हर दिन के लिए एक विषय (Theme) चुनें। उदाहरण के लिए, एक दिन सिर्फ ऑफिस के कागजी कामों के लिए रखें और दूसरा दिन मीटिंग्स के लिए। इससे बार-बार अलग-अलग तरह के काम बदलने से होने वाली मानसिक थकान कम होगी।

हर हफ्ते प्लानिंग और प्राथमिकताओं को तय करने के लिए थोड़ा समय निकालना आपकी उत्पादकता की मज़बूत नींव रखता है। यह तरीका आपको पूरे हफ्ते के लिए एक साफ रास्ता दिखाता है, जिससे आप बिना रुके अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ पाते हैं।

6. उत्पादकता (Productivity) और फोकस बढ़ाने के लिए रोज़ाना की आदतें

काम टालने की आदत को छोड़ना सिर्फ समय के मैनेजमेंट के बारे में नहीं है—यह हर दिन उन कामों को चुनने के बारे में भी है जो सच में मायने रखते हैं। अपनी रोज़ाना की आदतों में कुछ बदलाव करके आप अपनी तरक्की के लिए ज़रूरी कामों को समय पर पूरा कर सकते हैं। आइए इन तकनीकों पर एक नज़र डालते हैं:

अपने दिन की शुरुआत 'सबसे महत्वपूर्ण कार्यों' (MITs - Most Important Tasks) को पूरा करने से करें। ऐसे तीन काम चुनें जो आपके बड़े लक्ष्यों के लिए सबसे ज़रूरी हों और उन्हें सुबह जल्दी खत्म करने की कोशिश करें। इससे दिन की शुरुआत में ही आपकी अच्छी प्रगति हो जाएगी और आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।

दिन भर के कामों को बेहतर ढंग से चुनने के लिए 'आइजनहावर मैट्रिक्स' (Eisenhower Matrix) का इस्तेमाल करें। यह टूल कामों को चार हिस्सों में बांटता है:
  1. जो ज़रूरी और जल्द करने वाले हैं (Immediate)।
  2. जो ज़रूरी हैं पर बाद में किए जा सकते हैं (Schedule)।
  3. जो जल्द करने वाले हैं पर ज़रूरी नहीं (Delegate)।
  4. जो न ज़रूरी हैं न ही जल्द करने वाले (Delete)।
इससे आप फालतू के कामों में उलझे बिना ज़रूरी कामों पर ध्यान दे पाएंगे।

फोकस बनाए रखने के लिए 'पोमोडोरो तकनीक' (Pomodoro Technique) एक बेहतरीन तरीका है। इसमें आप 25 मिनट तक बिना रुके सिर्फ एक काम करते हैं और फिर एक छोटा सा ब्रेक लेते हैं। इससे आपका दिमाग थकता नहीं है और एकाग्रता बनी रहती है।

मुश्किल कामों को झेलने की आदत डालना भी ज़रूरी है। छोटे और थोड़े कठिन कामों से शुरुआत करें ताकि आपकी सहनशक्ति बढ़ सके। जब आप कोई मुश्किल बातचीत शुरू करते हैं या कोई जटिल प्रोजेक्ट हाथ में लेते हैं, तो आपको एहसास होता है कि वे उतने कठिन नहीं थे जितना आप सोच रहे थे।

अपनी जवाबदेही (Accountability) तय करें। अपने काम को ट्रैक करने के लिए ऐप्स का इस्तेमाल करें या किसी दोस्त के साथ मिलकर लक्ष्य तय करें। जब आपको किसी को अपनी रिपोर्ट देनी होती है, तो आप काम को टालने के बजाय उसे पूरा करने में ज़्यादा मेहनत करते हैं।

इन आदतों को अपने रोज़ाना के जीवन में शामिल करने से आप आलस से लड़ पाएंगे और आपकी उत्पादकता बढ़ेगी। हर नया दिन आपके लक्ष्यों की ओर बढ़ने का एक मौका है। याद रखें, लगातार की गई मेहनत ही सफलता की कुंजी है।

7. काम टालने की आदत को खत्म करने के लिए एक रणनीतिक योजना (Game Plan) बनाएं

अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए, अब समय आ गया है कि आपने जो कुछ भी सीखा है उसे एक ऐसी योजना में बदलें जिसे आप रोज़ाना लागू कर सकें। इसका मतलब है कि अब तक सीखी गई बातों को अपनी दिनचर्या और साप्ताहिक रूटीन का हिस्सा बनाना।

सबसे पहले, अपनी जिम्मेदारियों और लक्ष्यों की लिस्ट को समय-समय पर चेक करते रहें। यह देखते रहें कि क्या वे अभी भी आपके मूल्यों और प्राथमिकताओं के हिसाब से सही हैं। समय के साथ बदलाव करने से आपका उत्साह बना रहता है और आप एक ही जगह नहीं रुके रहते।

अपनी साप्ताहिक प्लानिंग को और बेहतर बनाने के लिए, उसमें महीने भर की समीक्षा (review) भी जोड़ें। इससे आपको बड़े बदलावों को समझने में मदद मिलेगी और आप यह पक्का कर पाएंगे कि आप सिर्फ व्यस्त नहीं हैं, बल्कि सही दिशा में काम कर रहे हैं।

अपनी छोटी-छोटी नई आदतों को पुरानी आदतों के साथ जोड़ें (Habit-stacking)। जैसे, अगर आपका ध्यान भटकता है, तो अपने सबसे ज़रूरी काम को शुरू करने से पहले 5 मिनट ध्यान (meditation) करने की आदत डालें।

कामों को बेहतर ढंग से चुनने के लिए 'आइजनहावर मैट्रिक्स' का इस्तेमाल जारी रखें। जो काम ज़रूरी तो हैं पर जल्दबाज़ी वाले नहीं, उन्हें दूसरों को सौंपना (delegate) सीखें या सॉफ्टवेयर की मदद से ऑटोमैटिक कर दें। इससे आप अपना पूरा ध्यान उन बड़े कामों पर लगा पाएंगे जिनका आपके लक्ष्यों पर सीधा असर पड़ता है।

हर दिन के अंत में अपनी खुद की जांच (accountability check) करें। देखें कि आपने जो सोचा था, उसमें से कितना पूरा किया। अगर कोई काम रह गया है, तो समझें कि आपने उसे क्यों टाला। यह आदत आपको अनुशासित बनाएगी और हर दिन बेहतर होने में मदद करेगी।

अब आप तैयार हैं! इन सुधारों और रणनीतियों को अपनाकर आप एक ऐसा ढांचा तैयार कर लेंगे जो काम टालने की आदत को जड़ से खत्म कर देगा। इस सिस्टम को अपनाएं और अपने दैनिक कार्यों के साथ-साथ लंबे समय के लक्ष्यों को भी हासिल करें। इस तरीके से, आलस और काम टालना जल्द ही पुरानी बातें बन जाएंगे।

निष्कर्ष (Conclusion)

स्टीव स्कॉट की किताब 'हाउ टू स्टॉप प्रोक्रास्टिनेटिंग' (How to Stop Procrastinating) का मुख्य सार यह है कि काम टालने की आदत को उत्पादकता में बदलना और अपने जीवन व करियर में आगे बढ़ना मुमकिन है। अपनी जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देकर और '25-5 नियम' के जरिए मुख्य प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करके, आप अपनी ऊर्जा सही कामों में लगा सकते हैं। हर तीन महीने के 'SMART' लक्ष्य तय करने से आपका उत्साह बना रहता है और आप अपने सपनों की दिशा में बढ़ते रहते हैं। 'ना' कहना सीखने से आप अपने ज़रूरी कामों के लिए समय बचा पाते हैं और हफ्ते भर की प्लानिंग आपको कामों को सही ढंग से मैनेज करने में मदद करती है। हर नया दिन इन तकनीकों को अपनाने का एक मौका है, जिससे धीरे-धीरे ऐसी आदतें बनती हैं जो आपको अनुशासित और केंद्रित बनाती हैं। यही तरीका आपको आलस छोड़कर स्थायी सफलता दिलाने में मदद करेगा।

तो, इस सारांश (summary) के लिए बस इतना ही। हमें उम्मीद है कि आपको यह पसंद आया होगा। अगर इससे आपके जीवन में कोई सुधार आया हो, तो इसे दूसरों के साथ भी शेयर करें और आने वाले सारांशों के लिए सब्सक्राइब करें। धन्यवाद।

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