Trending

Talent नहीं, Consistency आपको Successful बनाती है | Powerful Motivational Story in Hindi

Talent नहीं, Consistency आपको Successful बनाती है | Powerful Motivational Story in Hindi

Talent नहीं, Consistency आपको Successful बनाती है | Powerful Motivational Story in Hindi
Talent नहीं, Consistency आपको Successful बनाती है | Powerful Motivational Story in Hindi

राधे राधे दोस्तों, www.learningforlife.cc में आपका स्वागत है। एक समय की बात है, चीन के एक शांत गाँव में 'हेवन पीक' (स्वर्ग की चोटी) नाम का एक पहाड़ था। गाँव वालों का एक सपना था कि वे पहाड़ की सबसे ऊँची चोटी पर एक मंदिर बनाएँ, जहाँ से उनकी प्रार्थनाएँ सीधे आसमान तक पहुँच सकें। लेकिन चढ़ाई बहुत सीधी और मुश्किल थी, और रास्ता ख़तरनाक था।

गाँव के बुज़ुर्गों ने एलान किया, "जो कोई भी चोटी तक जाने के लिए सीढ़ियाँ बनाएगा, वह अपना और हम सबका नाम रोशन करेगा।" इस बात से पूरे गाँव में एक नया उत्साह दौड़ गया।

वेई नाम का एक बहुत बलवान नौजवान था। उसकी भुजाएँ बहुत शक्तिशाली थीं और उसकी आवाज़ में गज़ब का आत्मविश्वास था। उसने डींग मारते हुए कहा, "मैं सबसे पहले और सबसे तेज़ी से सीढ़ियाँ बनाकर दिखाऊँगा।" गाँव वालों ने तालियाँ बजाईं। सबको पूरा भरोसा था कि वेई ज़रूर कामयाब होगा।

लेकिन तभी, एक और इंसान आगे आया। वह लिन नाम की एक बूढ़ी विधवा थीं। उम्र के कारण उनकी पीठ झुक गई थी और उनके हाथ काँपते थे। भीड़ उन्हें देखकर हँसने लगी, "दादी लिन, आप तो कुएं से पानी भी ठीक से नहीं निकाल पातीं। आप पहाड़ पर चढ़ेंगी? आप सीढ़ियाँ कैसे बनाएँगी?" लिन सिर्फ मुस्कुराईं और बोलीं, "मैं रोज़ बस एक पत्थर ले जाऊँगी।"

काम शुरू हो गया। वेई बड़े-बड़े और भारी पत्थर लेकर पहाड़ पर चढ़ने लगा। वह बहुत तेज़ी और ताकत से काम कर रहा था। हर दिन वह भारी पत्थर रखता और गर्व से चिल्लाता। गाँव वाले उसकी ताकत की तारीफ़ करते नहीं थकते थे। दूसरी तरफ़, लिन रोज़ सिर्फ़ एक छोटा सा पत्थर लेकर जाती थीं। वह उसे अपने कपड़े में बाँध लेतीं और धीरे-धीरे, एक-एक कदम बढ़ाते हुए रास्ते पर चलतीं और उसे वहाँ रख देतीं।

शुरुआत में, वेई की सीढ़ियाँ बहुत तेज़ी से ऊपर बढ़ीं, जबकि लिन का काम ना के बराबर दिख रहा था। लेकिन हफ़्तों बीत गए। वेई थकने लगा। कुछ सुबह वह देर तक सोता रहता, तो कुछ दिन वह सोचता, 'मैं कल दोगुना काम कर लूँगा।' जल्द ही पहाड़ के नीचे उसके पत्थरों का ढेर ऐसे ही पड़ा रह गया।

और लिन? वह कभी नहीं रुकीं। गर्मी की धूप हो, पतझड़ की हवाएँ हों, सर्दियों की बर्फ़बारी हो या बसंत की बारिश—वह हर एक दिन पहाड़ चढ़ती रहीं। उनके पैर काँपते थे, फिर भी वह खुद से कहतीं, "बस एक पत्थर और। सिर्फ़ एक। आज के लिए।"

दिन महीनों में बदले और महीने सालों में। और एक सुबह, पहाड़ की चोटी पर एक घंटी बजी। गाँव वाले बाहर आए। उन्होंने ऊपर देखा तो उनकी आँखें खुली की खुली रह गईं। अब हेवन पीक पर बने मंदिर तक जाने के लिए पूरी सीढ़ियाँ तैयार थीं। आसमान में प्रार्थनाओं की गूँज सुनाई देने लगी।

यह लिन का काम था। वह महिला जिस पर सबने शक किया था, जिस पर सब हँसे थे, उसने एक-एक पत्थर रखकर पूरी सीढ़ी खड़ी कर दी थी। लोग उनके आगे झुक गए। उन्होंने कहा, "दादी लिन, आप सबसे बलवान नहीं थीं, न ही सबसे तेज़ थीं। लेकिन आपके लगातार कदमों ने स्वर्ग तक का रास्ता बना दिया।"

और वेई? वह भीड़ में चुपचाप खड़ा था। उसे तब अहसास हुआ कि बिना निरंतरता (निरंतर प्रयास) के हुनर वैसा ही है जैसे बिना बारिश के बादल गरजना। वह आवाज़ तो बहुत करता है, लेकिन धरती की प्यास नहीं बुझा सकता।

उस दिन के बाद से, उन सीढ़ियों को 'धैर्य का रास्ता' कहा जाने लगा। दूर-दूर से यात्री उस पर चलने आने लगे, जो उस बूढ़ी महिला की कहानी से प्रेरित थे जिसने हर दिन एक पत्थर रखकर स्वर्ग का मार्ग बना दिया था।

तो मेरे दोस्तों, इस बात को हमेशा याद रखना। सफलता उन्हें नहीं मिलती जो कभी-कभी बहुत बड़ा काम करते हैं। सफलता उन्हें मिलती है जो कभी हार नहीं मानते। हर दिन की जाने वाली छोटी से छोटी कोशिश भी एक दिन सफलता का पहाड़ बन जाती है।

अपना पत्थर आज उठाओ। दूसरा पत्थर कल उठाना। और एक दिन, आप भी अपनी मेहनत के रास्ते पर चलकर अपनी मंज़िल के राजा बनोगे। क्योंकि लगातार किया गया प्रयास हमेशा बड़े से बड़े हुनर को हरा देता है।


Post a Comment

Previous Post Next Post